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आईजीयू में निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन।

Published on: 16 Feb 2026

*आईजीयू में निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन।*



इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी में इतिहास विभाग द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System–IKS) के अंतर्गत “भारतीय संस्कृति के संरक्षण और प्रसार में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका” विषय पर एक निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत, परंपरागत ज्ञान प्रणाली तथा उसके समकालीन महत्व के प्रति वैचारिक जागरूकता एवं बौद्धिक रुचि का विकास करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विकास बत्रा उपस्थित रहे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताते हुए कहा कि IKS न केवल हमारे अतीत को समझने का माध्यम है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों के समाधान का भी मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विचारों की सराहना करते हुए इस प्रकार की अकादमिक गतिविधियों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस निबंध लेखन प्रतियोगिता में इतिहास विभाग के शोधार्थियों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विषय के विभिन्न आयामों जैसे संस्कृति, दर्शन, शिक्षा, पर्यावरण, नैतिक मूल्य एवं सामाजिक समरसता पर अपने मौलिक विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता के परिणाम में इतिहास विभाग की शोधार्थी भारती तथा एम.ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा प्रीति ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। अंजलि और नितिन ने द्वितीय स्थान तथा प्रगति और नेहा ने तृतीय स्थान हासिल किया। इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. ऋतु के तत्वाधान में किया गया, जिनके मार्गदर्शन में प्रतियोगिता को सुचारु एवं सफल रूप से संपन्न किया गया। प्रतियोगिता में मुख्य निर्णायक की भूमिका डॉ. अविनाश आर्य एवं डॉ. कमलेश नरवाना ने निभाई। उन्होंने निबंधों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, मौलिकता, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण तथा प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया और प्रतिभागियों को उपयोगी अकादमिक सुझाव भी दिए। कार्यक्रम में इतिहास विभाग के समस्त अध्यापकगण की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन हुआ। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। यह प्रतियोगिता न केवल शैक्षणिक दृष्टि से उपयोगी सिद्ध हुई, बल्कि भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुई।